एआई-प्रेरित श्रम बाज़ार के लिए आजीवन अधिगम/शिक्षा

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ 

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने अपनी रिपोर्ट में सरकारों से आग्रह किया है कि वे श्रम बाज़ारों में तीव्र तकनीकी और संरचनात्मक परिवर्तनों के बीच आजीवन शिक्षा को आर्थिक एवं सामाजिक नीति का केंद्रीय स्तंभ बनाएँ।

आजीवन अधिगम क्या है?

  • आजीवन अधिगम का अर्थ है व्यक्ति के जीवनभर ज्ञान, कौशल और दक्षताओं का सतत् अर्जन। इसमें शामिल हैं:
    • औपचारिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण।
    • कार्य अनुभव और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से अनौपचारिक शिक्षा।
    • बदलते श्रम बाज़ारों के अनुरूप निरंतर पुनः कौशल और कौशल उन्नयन।

ILO रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष 

  • शिक्षा अवसरों में असमानता: असंगठित श्रमिक, निम्न-आय वर्ग, महिलाएँ और कम शिक्षित व्यक्तियों को प्रशिक्षण अवसरों तक पहुँच कम है।
    • रिपोर्ट ने औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों के बीच बढ़ती “शिक्षा खाई” को रेखांकित किया।
  • औपचारिक शिक्षा पर अत्यधिक बल: वर्तमान नीतियाँ प्रारंभिक औपचारिक शिक्षा पर अधिक केंद्रित हैं, जबकि जीवनभर कौशल विकास की उपेक्षा होती है।
  • पहुँच अंतर: सर्वेक्षण से पूर्व 12 महीनों में केवल 15–64 आयु वर्ग के 16% लोग ही संरचित प्रशिक्षण में शामिल हुए।
    • औपचारिक क्षेत्र की स्थायी पूर्णकालिक नौकरियों में कार्यरत लगभग 51% श्रमिकों को नियोक्ता द्वारा प्रशिक्षण मिला।

आजीवन अधिगम क्यों महत्वपूर्ण हो रही है?

  • तकनीकी परिवर्तन: तीव्र डिजिटलाइजेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रसार पारंपरिक रोजगारों को बदल रहा है और नए कौशल की आवश्यकता उत्पन्न कर रहा है।
  • स्वचालन: दोहराए जाने वाले और कम कौशल वाले कार्यों को प्रतिस्थापित करेगा, जिससे उन्नत संज्ञानात्मक और डिजिटल कौशल की माँग बढ़ेगी।
  • हरित परिवर्तन: नवीकरणीय ऊर्जा, सतत उद्योग और जलवायु-संवेदनशील अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव नए रोजगार क्षेत्रों का निर्माण कर रहा है।
  • जनसांख्यिकीय परिवर्तन: कई देशों में वृद्धजन आबादी और विकासशील देशों में युवा-प्रधान जनसंख्या श्रम आपूर्ति की गतिशीलता को बदल रही है।
  • कार्य का बदलता स्वरूप: गिग अर्थव्यवस्था, दूरस्थ कार्य और प्लेटफ़ॉर्म-आधारित रोजगार श्रमिकों से निरंतर कौशल उन्नयन की अपेक्षा करते हैं।

प्रमुख सरकारी पहल

  • स्किल इंडिया मिशन: युवाओं को उद्योग-संबंधी कौशल में प्रशिक्षित कर रोजगार क्षमता बढ़ाना और कौशल अंतर को कम करना।
  • जन शिक्षण संस्थान (JSS): निरक्षर, नव-साक्षर और विद्यालय छोड़ चुके व्यक्तियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना, विशेषकर ग्रामीण, महिला और हाशिए पर स्थित समुदायों को।
  • राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS): अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना; प्रशिक्षण में मूलभूत और उद्योग-आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने हेतु उद्योग-संबंधी अल्पकालिक प्रशिक्षण, पूर्व कौशल की मान्यता (RPL) और विशेष परियोजनाएँ।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: सभी शैक्षणिक संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा शिक्षा में एकीकृत करने की सिफारिश।

चुनौतियाँ 

  • डिजिटल अंतर: इंटरनेट और डिजिटल अवसंरचना तक असमान पहुँच ऑनलाइन शिक्षा में भागीदारी को सीमित करती है।
  • असंगठित कार्यबल: भारत जैसे देशों में विशाल असंगठित कार्यबल को प्रशिक्षण और पुनः कौशल हेतु संस्थागत सहयोग का अभाव।
  • वित्तीय बाधाएँ: उच्च प्रशिक्षण लागत कमजोर वर्गों की भागीदारी को हतोत्साहित करती है।
  • संस्थागत विखंडन: सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वय की कमी कौशल पारिस्थितिकी को कमजोर करती है।
  • तीव्र कौशल अप्रचलन: तकनीकी परिवर्तन वर्तमान कौशल को शीघ्र अप्रचलित बना रहा है।

ILO की सिफारिशें

  • समावेशी शिक्षा प्रणाली: महिलाओं, असंगठित श्रमिकों, ग्रामीण आबादी और कमजोर वर्गों के लिए सुलभ एवं किफायती प्रशिक्षण सुनिश्चित करना।
  • सार्वजनिक–निजी भागीदारी को सुदृढ़ करना: सरकारों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग से प्रशिक्षण को श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना।
  • लचीले शिक्षा मॉडल: मॉड्यूलर पाठ्यक्रम, ऑनलाइन शिक्षा, माइक्रो-क्रेडेंशियल्स और कार्यस्थल शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
  • सामाजिक सुरक्षा: पुनः प्रशिक्षण और रोजगार परिवर्तन की अवधि में श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का सहयोग मिलना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन  ILO)

  • यह एक संयुक्त राष्ट्र एजेंसी है जिसकी स्थापना 1919 में वर्साय संधि के अंतर्गत हुई, जिसने प्रथम विश्व युद्ध को  समाप्त किया।
  • 1946 में यह संयुक्त राष्ट्र की प्रथम विशिष्ट एजेंसी बनी।
  • भारत 1919 में ILO का संस्थापक सदस्य बना, स्वतंत्रता प्राप्त करने से पहले ही।
    • इसके 187 सदस्य राष्ट्र हैं।
  • यह श्रम मानक निर्धारित करता है, नीतियाँ विकसित करता है और सभी महिलाओं एवं पुरुषों के लिए सम्मानजनक कार्य को प्रोत्साहन देने वाले कार्यक्रम तैयार करता है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र त्रिपक्षीय एजेंसी है जो सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों को एक मंच प्रदान करती है।
  • इसका मुख्यालय जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में स्थित है।

Source: TH

 

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